यह एक सरकारी Defense sector की कंपनी है, जो पिछले कुछ सालों में निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दे चुकी है। अप्रैल 2021 में जहां इसका शेयर प्राइस करीब ₹100.58 था, वहीं 17 अप्रैल 2026 तक यह बढ़कर लगभग ₹2,618 के स्तर तक पहुंच गया। यानी करीब 5 साल में स्टॉक ने लगभग 2,502% का रिटर्न दिया और ₹1 लाख की रकम को करीब ₹26 लाख के आसपास में बदल दिया।
शेयर प्राइस और रिटर्न का रिकॉर्ड
अप्रैल 2021 में मज़गांव डॉक का शेयर लगभग ₹100.58 पर ट्रेड हो रहा था, जबकि 17 अप्रैल 2026 को यह बढ़कर करीब ₹2,618 प्रति शेयर के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान स्टॉक ने करीब 2,502 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जो किसी भी डिफेंस सेक्टर शेयर के लिए एक मजबूत मल्टीबैगर प्रदर्शन माना जा सकता है। यदि किसी निवेशक ने 5 साल पहले इस शेयर में ₹1,00,000 लगाए होते, तो आज वह निवेश लगभग ₹26,00,000 तक बढ़ चुका होता। मौजूदा स्तरों पर कंपनी का मार्केट कैप लगभग ₹1,05,617 करोड़ के आसपास है और शेयर करीब 44 के P/E अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, जो इंडस्ट्री P/E 43 के आसपास के बराबर है।
कंपनी का व्यवसाय
मज़गांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाली एक सरकारी कंपनी है, जिसका हेडक्वार्टर मुंबई में स्थित है। कंपनी भारतीय नौसेना के लिए वॉरशिप, डेस्ट्रॉयर, फ्रिगेट और पनडुब्बियों के निर्माण में विशेषज्ञता रखती है, साथ ही शिप रिपेयर और ऑफशोर इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट भी संभालती है। भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता को मजबूत बनाने में इसका महत्वपूर्ण योगदान है और इसका बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स पर आधारित है, जिससे रेवेन्यू की स्थिरता बनी रहती है।
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इंफ्रास्ट्रक्चर
कंपनी के पास शिपबिल्डिंग और सबमरीन दोनों सेगमेंट में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। इसकी सुविधाओं में 3 ड्राई डॉक, 3 वेट बेसिन, 3 बड़े स्लिपवे और 6 छोटे स्लिपवे शामिल हैं, साथ ही प्रोडक्शन, असेंबली और इलेक्ट्रिकल शॉप्स भी हैं। यहां 300 टन की गॉलिएथ क्रेन, शोर इंटीग्रेशन फैसिलिटी, मशीन व फिटिंग शॉप और इंस्ट्रुमेंटेशन शॉप जैसी उन्नत सुविधाएं मौजूद हैं, जो जटिल डिफेंस प्रोजेक्ट पूरे करने में मदद करती हैं।
ऑर्डर बुक की स्थिति
31 दिसंबर 2025 तक मज़गांव डॉक की कुल ऑर्डर बुक लगभग ₹23,758 करोड़ के स्तर पर थी, जिसमें ज्यादातर ऑर्डर रक्षा मंत्रालय से मिले शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट्स से जुड़े हैं। इसमें P17A स्टील्थ फ्रिगेट और कोस्ट गार्ड वेसल जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं, जो अभी निर्माणाधीन हैं और आने वाले वर्षों के लिए रेवेन्यू विजिबिलिटी सुनिश्चित करते हैं। कंपनी ने पनडुब्बी प्रोग्राम P75 कलवरी जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट पूरे किए हैं, लेकिन इसके साथ ही रिफिट, अपग्रेड और एडवांस सिस्टम्स के काम से भी बिजनेस मिलता रहता है, साथ ही ONGC जैसे ऑयल सेक्टर प्रोजेक्ट्स में भी कंपनी अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।
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ताज़ा वित्तीय प्रदर्शन
हालिया वित्त वर्ष में कंपनी की रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस लगभग ₹3,144 करोड़ से बढ़कर ₹3,601 करोड़ तक पहुंची, यानी करीब 14.5% की सालाना वृद्धि दर्ज की गई। ऑपरेटिंग प्रॉफिट ₹817 करोड़ से बढ़कर ₹887 करोड़ हो गया, जो लगभग 8.5% की ग्रोथ दिखाता है, जबकि नेट प्रॉफिट ₹807 करोड़ से बढ़कर ₹880 करोड़ तक पहुंचा, जिसमें करीब 9% की वृद्धि रही। तिमाही आधार पर भी कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन दिखाया, जहां रेवेन्यू ₹2,929 करोड़ से बढ़कर ₹3,601 करोड़ हुआ, ऑपरेटिंग प्रॉफिट 27.6% बढ़ा और नेट प्रॉफिट में करीब 17.5% की बढ़ोतरी देखने को मिली।
Disclaimer : इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक और जनरल इनफॉर्मेशन के उद्देश्य से तैयार की गई है, इसे किसी भी तरह की निवेश या ट्रेडिंग सलाह नहीं माना जाए।







